नई दिल्ली:
केंद्रीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत देते हुए केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पुरानी पेंशन योजना (OPS) में पेंशन मामलों को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बना दिया है। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में एक संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जो 17 सितंबर 2025 के पुराने दिशानिर्देशों की जगह लेगी।
यह नया नियम विशेष रूप से उन पात्र मामलों पर लागू होगा, जहां किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है या वह दिव्यांगता (Disability) का शिकार हो जाता है।
📌 मुख्य बदलाव और नई प्रक्रिया:
- नया नियमित PPO जारी होगा: NPS से OPS में माइग्रेशन की प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित पेंशनर को एक नया पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी किया जाएगा।
- पुराना PPPO जमा करना जरूरी: नया PPO मिलने के बाद पेंशनर को अपना पुराना प्रोविजनल पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPPO) बैंक में जमा कराना होगा, जिसे बैंक आवश्यक अधिकारियों तक आगे भेजेगा।
- विभागीय जिम्मेदारी: नया PPO समय पर तैयार करने का जिम्मा संबंधित सरकारी विभागों और पेंशन अधिकारियों का होगा।
- जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate): पेंशन जारी रखने के लिए पेंशनरों को हर साल नवंबर महीने में बैंक में अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कराना होगा।
🏛️ सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, पुरानी प्रक्रिया के तहत NPS से OPS में पेंशन ट्रांसफर के दौरान कर्मचारियों और उनके परिवारों को कई तकनीकी व प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
“इन चुनौतियों को दूर करने और प्रक्रिया को पारदर्शी व आसान बनाने के उद्देश्य से ही नई SOP को मंजूरी दी गई है। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसके प्रावधानों की जानकारी निचले स्तर तक पहुंचाएं।”
💻 ‘NPS सेंट्रल’ प्लेटफॉर्म से पेंशन सेवाएं हुईं और आसान
इस कदम के साथ ही, पेंशनधारकों की सहूलियत के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘एनपीएस सेंट्रल’ (NPS Central) की भी शुरुआत की गई है।
- एक ही छत के नीचे सेवाएं: इस सिंगल प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशक आसानी से रजिस्ट्रेशन, निवेश और अपने पेंशन खातों का प्रबंधन कर सकते हैं।
- संयुक्त पहल: इसे NPS की तीनों केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों (CRAs) ने मिलकर विकसित और प्रबंधित किया है, जिससे पेंशन से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच काफी आसान हो गई है।
निष्कर्ष: सरकार के इस फैसले से सर्विस के दौरान अप्रिय घटना (मौत या दिव्यांगता) का शिकार हुए कर्मचारियों के परिजनों को कागजी औपचारिकताओं और दफ्तरों के चक्कर लगाने से बड़ी राहत मिलेगी।
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