महाराष्ट्र में सभी सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने और संशोधित राष्ट्रीय पेंशन योजना (RNPS) की विसंगतियों को दूर करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इसी सिलसिले में 30 अक्टूबर को मंत्रालय में वित्त विभाग के अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वित्त विभाग (लेखा एवं कोषागार) की प्रधान सचिव डॉ. रिचा बागला ने की। इसमें विधायक सुधाकर अडबाले सहित अन्य जनप्रतिनिधि और कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में 1 नवंबर 2005 के बाद नियुक्त एनपीएस और डीसीपीएस के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इस मांग को नीतिगत विषय बताते हुए प्रधान सचिव ने इस पर सकारात्मक भूमिका प्रस्तुत करने की बात कही। इसके साथ ही ऐसे अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों को भी ओपीएस का लाभ देने की मांग की गई, जिन्होंने 1 नवंबर 2005 से पहले नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनकी नियुक्ति बाद में हुई।
बैठक में वर्ष 2002 से वस्तीशाला शिक्षकों की संविदा सेवा को पेंशन के लिए मान्य करने, सेवाकाल में कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को पारिवारिक पेंशन देने के लिए लागू सात साल की न्यूनतम सेवा की शर्त हटाने और आरएनपीएस में कर्मचारियों के 10 प्रतिशत अनिवार्य अंशदान से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने का मुद्दा भी उठाया गया।
इसके अलावा सेवानिवृत्ति के बाद 50 प्रतिशत पेंशन, बढ़ी हुई पारिवारिक पेंशन, वेतन आयोग के लाभ, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के स्पष्ट नियम और पेंशन अंशराशीकरण की सुविधा देने की मांग रखी गई। एनपीएस लागू करने में प्रशासनिक देरी के कारण अंशदान जमा नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रावधान बनाने तथा न्यूनतम 7,500 रुपये पेंशन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने की मांग भी की गई।
विधायक सुधाकर अडबाले ने कहा कि कर्मचारियों ने पूरी सेवा के दौरान वेतन से अंशदान जमा किया है, फिर भी उन्हें उचित पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की। बैठक में कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और वित्त विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।