नई दिल्ली। देश में जीएसटी (GST) व्यवस्था को और आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य कारोबारियों को टैक्स से जुड़े अनावश्यक कानूनी विवादों और कार्रवाई की परेशानियों से राहत देना है। प्रस्तावित बदलावों से छोटे कारोबारियों, MSME और नए बिजनेस शुरू करने वाले उद्यमियों को विशेष फायदा मिलने की उम्मीद है।
GST काउंसिल ने क्या दिए बड़े सुझाव?
GST काउंसिल की 57वीं बैठक में टैक्स से जुड़े अपराधों और कानूनी कार्रवाई के नियमों में कई अहम बदलावों की सिफारिश की गई है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव सेंट्रल GST एक्ट के सेक्शन 69 को हटाने का है। इसके लागू होने पर GST कानून के तहत गिरफ्तारी से जुड़ी मौजूदा शक्तियों में बड़ा बदलाव होगा।
इसके अलावा आपराधिक मुकदमा चलाने की मौद्रिक सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। यानी अब पहले के मुकाबले अधिक बड़ी रकम से जुड़े मामलों में ही आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई किए जाने की सिफारिश है।
काउंसिल ने सेक्शन 132 के तहत आने वाले कुछ अपराधों का दायरा सीमित करने और सजा निर्धारित करने में अदालतों को अधिक अधिकार देने का सुझाव भी दिया है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए संबंधित कानूनों में संशोधन करना जरूरी होगा।
उद्योग जगत ने फैसले का किया स्वागत
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने GST काउंसिल की सिफारिशों का स्वागत किया है। संगठन के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी के मुताबिक, ये प्रस्ताव देश में भरोसे पर आधारित टैक्स व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कारोबारियों को नियमों में स्पष्टता मिलेगी और कानूनी कार्रवाई के दौरान उनके अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
क्या टैक्स चोरी करने वालों को मिलेगी राहत?
प्रस्तावित बदलावों का मतलब यह नहीं है कि टैक्स चोरी करने वालों को खुली छूट मिल जाएगी। गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर टैक्स चोरी करने के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान बना रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य छोटी प्रक्रियागत गलतियों और जानबूझकर किए गए आर्थिक अपराधों के बीच अंतर स्पष्ट करना है।
छोटे कारोबारियों को क्या होगा फायदा?
नए प्रस्ताव लागू होने पर छोटे कारोबारियों और MSME को कानूनी खर्च में राहत मिल सकती है। साथ ही जांच और मुकदमों के कारण कारोबार में आने वाली रुकावटें भी कम होने की उम्मीद है। इससे नए उद्यमियों को बिजनेस शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल मिल सकता है।
हालांकि, इन सुधारों का वास्तविक लाभ कानून में संशोधन और राज्यों में इनके समान रूप से लागू होने के बाद ही मिल पाएगा।