काठमांडू । नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने के बाद आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। पानी के साथ चट्टान, बर्फ और मलबे का तेज बहाव कई इलाकों में घुस गया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में अब तक 390 से अधिक मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि 1,500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल का रसुवा जिला इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। बुधवार सुबह करीब 8:40 बजे लेंडे खोला नदी की घाटी में अचानक पानी और मलबे का सैलाब आया। देखते ही देखते कई गांव इसकी चपेट में आ गए। बाढ़ के तेज बहाव में करीब 19 पुल और लगभग 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त होकर बह गईं। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
बारिश के बिना कैसे आई इतनी बड़ी बाढ़?
इस आपदा की सबसे बड़ी वजह यह है कि बाढ़ से ठीक पहले प्रभावित इलाके में कोई खास बारिश नहीं हुई थी। प्रारंभिक जानकारी और सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा। इसके साथ बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा भी नीचे आया।
यह मलबा तिब्बत में ल्हेंडे नदी तक पहुंचा और कुछ समय के लिए नदी का प्रवाह बाधित हो गया। इसके बाद प्राकृतिक रूप से बना मलबे का बांध टूट गया और पानी का तेज बहाव नेपाल की ओर बढ़ गया। इसी ने आगे चलकर विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया।
कई जिलों में पहुंचा बाढ़ का असर
बाढ़ का शुरुआती प्रभाव लेंडे खोला क्षेत्र में देखने को मिला, जो आगे भोटे कोशी और त्रिशूली नदी से जुड़ता है। त्रिशूली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट में करीब 9 मीटर तक बढ़ गया। रसुवा जिले के टिमुरे और स्याप्रु बेसी समेत कई इलाके प्रभावित हुए।
इसके बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट और धाडिंग जिलों के कुछ हिस्सों तक पहुंचा। त्रिशूली नदी आगे नारायणी नदी में मिलती है, जो भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी के नाम से जानी जाती है। यही वजह है कि नेपाल की इस आपदा को लेकर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ गई है।
सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता
नेपाल में मृतकों की संख्या 389 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, 34 देशों के करीब 668 पर्यटकों का संपर्क टूट गया है। इनमें भारत के 177, अमेरिका के 90, ऑस्ट्रेलिया के 34, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 25 नागरिक शामिल हैं।
सीमा के दूसरी ओर चीन के तिब्बत स्थित ग्यिरॉन्ग काउंटी में भी कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। वहां 558 लोगों के लापता होने की सूचना है, जिनमें करीब 260 विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में लापता लोगों में लगभग 100 चीनी नागरिक भी शामिल हैं।
राहत और बचाव अभियान जारी
आपदा के बाद नेपाल सेना और पुलिस के 5,000 से अधिक जवान राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हैं। हेलीकॉप्टर, ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है। बाढ़ से कटे इलाकों में हेलीकॉप्टरों के जरिए भोजन, टेंट और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
इस बीच, अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे करीब 350 मजदूरों और अन्य लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। खराब मौसम और भारी मलबे के कारण कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है।
एक और खतरे ने बढ़ाई चिंता
नेपाल के अधिकारियों के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पानी जमा होने से एक झील बन गई है और उसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। आशंका है कि यदि यह प्राकृतिक जलाशय टूटता है तो निचले इलाकों में एक और तेज बाढ़ आ सकती है।
प्रशासन त्रिशूली और गंडक नदी के किनारे बसे क्षेत्रों पर विशेष नजर रख रहा है। भारत की सीमा से लगे इलाकों को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्गम इलाकों तक बचाव दलों की पहुंच होने के बाद मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े में और बदलाव हो सकता है।