उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एमएलसी चुनाव के नतीजों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। 11 सीटों पर हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) ने पांच सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। इस जीत के साथ विधान परिषद में सपा की कुल सदस्य संख्या 12 हो जाएगी।
इसका सबसे बड़ा फायदा सपा को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल करने के रूप में मिल सकता है। इस पद के लिए कम से कम 10 एमएलसी का होना जरूरी है।
लखनऊ में BJP को सबसे बड़ा झटका
सपा ने भाजपा को सबसे बड़ा झटका लखनऊ स्नातक सीट पर दिया। यहां सपा की कांति सिंह ने भाजपा उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह को 14,855 वोटों से हराया। कांति सिंह को 51,168 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 36,313 वोट हासिल हुए।
वहीं, आगरा शिक्षक सीट पर भी सपा के आकाश अग्रवाल ने 14,046 वोटों से जीत दर्ज की। इसके अलावा पार्टी वाराणसी की अपनी दोनों सीटें बचाने में सफल रही।
शिक्षकों के बीच BJP का दबदबा बरकरार
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटों में भाजपा ने चार पर जीत हासिल की, जबकि दो सीटें सपा के खाते में गईं। भाजपा के उमेश द्विवेदी, श्रीचंद शर्मा और हरि सिंह ढिल्लों ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने मुकाबला जीता।
विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश को मजबूती
एमएलसी चुनाव में मिली जीत से विधानसभा चुनाव से पहले सपा का मनोबल बढ़ना तय माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने इसे शिक्षकों, छात्रों और बेरोजगार युवाओं की भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी का संकेत बताया है।
उन्होंने चुनाव में कथित हेरफेर का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा के उम्मीदवार वास्तव में हारे नहीं हैं, बल्कि भाजपा की कथित हेरफेर के कारण उन्हें जीत का प्रमाणपत्र नहीं मिल सका।
कुल मिलाकर, एमएलसी चुनाव में सपा की पांच सीटों पर जीत ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बना दिए हैं। अब सबकी नजर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर है।