मासिक पत्रिका

छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़ी-छत्तीसगढ़िया

पूजा में नारियल क्यों फोड़ा जाता है? जानिए धार्मिक मान्यता और इसका खास महत्व

हिंदू धर्म में नारियल को बेहद पवित्र माना जाता है। पूजा-पाठ से लेकर गृह प्रवेश, नई गाड़ी खरीदने और नए कारोबार की शुरुआत तक कई शुभ अवसरों पर नारियल चढ़ाने या फोड़ने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे शुभता, समृद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

नारियल को संस्कृत में श्रीफल कहा जाता है। मान्यता है कि इसमें माता लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इसे अर्पित करना मंगलकारी माना जाता है। नारियल के बाहरी हिस्से को मनुष्य के अहंकार और अंदर के सफेद भाग को शुद्ध मन का प्रतीक माना जाता है। नारियल फोड़ने का भाव यही है कि व्यक्ति अपने अहंकार और नकारात्मक विचारों को त्यागकर नए कार्य की शुरुआत करे।

नारियल पर मौजूद तीन निशानों को कई धार्मिक परंपराओं में ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इसे धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान प्राप्त है।

कुछ मान्यताओं में नारियल फोड़ने की परंपरा को पशु बलि के विकल्प से भी जोड़ा जाता है। इसमें नारियल अर्पित करना बिना हिंसा के ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक माना गया।

धार्मिक महत्व के अलावा नारियल भारतीय खानपान का भी अहम हिस्सा है। नारियल पानी, गिरी, दूध और सूखे नारियल का इस्तेमाल विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है। नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटैशियम पाए जाते हैं, जबकि नारियल की गिरी में वसा और आहार फाइबर मौजूद होते हैं।

0
Show Comments (0) Hide Comments (0)
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Recent Posts:
Share
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x