नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) शाम 4 बजे 350 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इस साल 20 जनवरी के बाद यह सबसे खराब वायु गुणवत्ता का स्तर है। उस दिन AQI 378 दर्ज किया गया था।
मंगलवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में धुंध की मोटी परत देखने को मिली। प्रदूषण की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहांगीरपुरी में AQI 452 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है। वहीं, राजधानी के 10 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार दर्ज किया गया।
लगातार तीसरे दिन बढ़ा प्रदूषण
दिल्ली में पिछले तीन दिनों से वायु प्रदूषण में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। 1 नवंबर को AQI 261 था, जो 2 नवंबर को बढ़कर 324 और 3 नवंबर को 350 पहुंच गया। इसके साथ ही हवा में मौजूद PM2.5 के हानिकारक कणों का स्तर भी बढ़ रहा है।
PM2.5 में पराली के धुएं की हिस्सेदारी बढ़ने का अनुमान
प्रदूषण में पराली जलाने से निकलने वाले धुएं का योगदान भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 2 नवंबर को 8.583 प्रतिशत थी, जो 3 नवंबर को बढ़कर 15.301 प्रतिशत हो गई।
अनुमान है कि 4 नवंबर को यह हिस्सेदारी 20.057 प्रतिशत और 5 नवंबर को 22.207 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके अलावा आगामी दिनों में दिवाली की आतिशबाजी भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
सुबह और शाम धुंध बढ़ने की चेतावनी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 9 नवंबर तक दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में सुबह के समय धुंध छाई रह सकती है। इस दौरान सुबह और शाम हवा की रफ्तार धीमी रहने की संभावना है, जिससे प्रदूषक कण वातावरण में बने रह सकते हैं। 6 नवंबर तक हवाओं का रुख उत्तर-पश्चिमी रहने का अनुमान है।
पंजाब में पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं
पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 2 नवंबर के बीच देश के विभिन्न राज्यों में खेतों में आग लगने की कुल 3,535 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें पंजाब 1,612 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा।
राजस्थान में 738, मध्य प्रदेश में 614, उत्तर प्रदेश में 349, उत्तराखंड में 176, हरियाणा में 44 और दिल्ली में दो घटनाएं दर्ज की गईं।
पिछले वर्षों के मुकाबले कम हुईं घटनाएं
आंकड़ों के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्षों की तुलना में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में इसी अवधि के दौरान 51,822 घटनाएं सामने आई थीं। वर्ष 2021 में यह संख्या घटकर 24,583 और 2022 में 26,490 रही। वहीं, वर्ष 2025 में कुल 4,993 घटनाएं दर्ज की गई थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने का सीजन सामान्यतः 15 सितंबर से 30 नवंबर तक रहता है। ऐसे में नवंबर के दौरान पराली जलाने की घटनाओं और मौसम की परिस्थितियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।