संयुक्त राष्ट्र (UN): भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद, मानवाधिकारों और पाकिस्तान की दोगली नीति पर कड़ा प्रहार किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की पहली सचिव भाविका मंगलानंदन ने ‘धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता’ पर आयोजित बैठक में पाकिस्तान के दोहरे रवैये की पोल खोलते हुए कड़े शब्दों में लताड़ लगाई।
1. आतंकवादियों का सम्मान बनाम पीड़ितों के अधिकार
विशेष रिपोर्ट में आतंकवादियों के दफनाने व अंतिम संस्कार के अधिकारों की वकालत करने पर भारतीय राजनयिक ने कड़ा ऐतराज जताया।
- पीड़ितों का हक पहले: उन्होंने कहा कि जघन्य अपराध करने वाले आतंकवादियों के अधिकार उन बेगुनाह पीड़ितों के जीने के अधिकार से बढ़कर नहीं हो सकते, जिनकी जान आतंकी हमलों में जाती है।
- मानवता पर हमला: आतंकी केवल इंसानों को नहीं मारते, बल्कि पूरे देश की शांति और संवेदना को नुकसान पहुँचाते हैं।
- दोहरा मापदंड: यह बेहद दुखद है कि जितना जोर आतंकियों के अधिकारों पर दिया जा रहा है, उतना उन निर्दोष लोगों के प्रति नहीं दिखता जिन्होंने आतंकवाद के कारण अपनों को खोया है।
2. कारगिल युद्ध की याद दिलाकर पाकिस्तान को घेरा
धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों पर पाकिस्तान की बातें सुनकर भाविका मंगलानंदन ने 1999 के कारगिल युद्ध का ऐतिहासिक सच याद दिलाया:
- अपने ही सैनिकों को ठुकराया: पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए अपने ही जवानों के शवों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था।
- भारतीय सेना का बड़प्पन: भारत ने मर्यादा का परिचय देते हुए उन पाकिस्तानी सैनिकों का पूर्ण सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया था।
- ऐसे देश का धार्मिक आजादी और दफनाने के अधिकारों पर ज्ञान देना पूरी तरह से हास्यास्पद और पाखंड है।
3. COVID-19 रिपोर्ट के पक्षपातपूर्ण रवैये पर सवाल
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में महामारी के दौरान हुई कमियों और भेदभाव का ठीकरा मुख्य रूप से ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) पर फोड़े जाने पर भारत ने आपत्ति जताई।
- पश्चिमी देशों की अनदेखी: रिपोर्ट में विकसित देशों में हुई इसी तरह की गंभीर और दुखद घटनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
- राजनीतिकरण का विरोध: उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इंसानी दुख-दर्द और धार्मिक स्वतंत्रता का राजनीतिकरण बंद होना चाहिए। मानवाधिकार उल्लंघनों को बिना किसी भेदभाव या सिलेक्टिव अप्रोच के निष्पक्षता से देखा जाना चाहिए।