मासिक पत्रिका

छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़ी-छत्तीसगढ़िया

सेवा की कहानी: पोषण पुनर्वास केंद्र ने ओमेश को कुपोषण से उबारा, अब स्वस्थ होकर लौटा घर

पोषण माह में पोषण, उपचार और मातृ जागरूकता का संदेश बनी ओमेश की कहानी

रायपुर ,  राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान गरियाबंद से सामने आई ओमेश यादव की कहानी यह बताती है कि समय पर उपचार, पोषणयुक्त आहार और विशेष देखभाल से गंभीर कुपोषण को दूर किया जा सकता है। ग्राम दादरगांव निवासी डेढ़ वर्षीय ओमेश गंभीर कुपोषण के साथ जिला चिकित्सालय गरियाबंद स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचा था। उपचार और नियमित देखभाल के बाद अब वह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है।

भर्ती के समय ओमेश का वजन महज 5.1 किलोग्राम था। वह चलने-फिरने में असमर्थ था और निमोनिया, बुखार, सर्दी तथा कान के संक्रमण से पीडि़त था। चिकित्सकीय जांच के बाद उसे पोषक आहार, आवश्यक दवाइयां और विशेष देखभाल उपलब्ध कराई गई। 16 दिनों के उपचार के बाद उसका वजन बढ़कर 6.40 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार के साथ वह अब चलने-फिरने और मुस्कुराने लगा है। आवश्यक दवाइयों और देखभाल संबंधी सलाह के साथ उसे केंद्र से छुट्टी दी गई।

मां को भी दिया पोषण और स्वच्छता का प्रशिक्षण

पोषण पुनर्वास केंद्र में ओमेश के उपचार के साथ उसकी मां श्रीमती सुरेखा यादव को भी बच्चे के खान-पान, स्वच्छता, देखभाल और पोषण संबंधी जरूरी जानकारी दी गई। केंद्र में निर्धारित अवधि तक रहने पर उन्हें प्रतिदिन 150 रुपये की दर से कुल 2 हजार 250 रुपये की सहायता राशि बैंक खाते के माध्यम से प्रदान की गई। इससे परिवार को बच्चे के उपचार के दौरान आवश्यक सहयोग भी मिला।

3,876 बच्चों को उपचार से मिला कुपोषण से बाहर आने का अवसर

जिला चिकित्सालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में अब तक 3 हजार 876 बच्चों को भर्ती कर उपचार, पोषक आहार और विशेष देखभाल के माध्यम से कुपोषण से मुक्त किया जा चुका है। अप्रैल से अगस्त 2026 तक केंद्र की बिस्तर अधिभोग दर 164 प्रतिशत तथा प्राप्तांक दर 95 प्रतिशत रही है। केंद्र लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करता रहा है।

केंद्र में बच्चों के साथ उसेवा की कहानी: पोषण पुनर्वास केंद्र ने ओमेश को कुपोषण से उबारा, अब स्वस्थ होकर लौटा घरनकी माताओं के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय पोषण माह के उस संदेश को मजबूत करती है कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए उपचार के साथ-साथ परिवार और समुदाय की जागरूकता भी जरूरी है।

पोषण माह में ‘सेवा की कहानी’ बनी प्रेरणा

ओमेश की स्वस्थ होकर घर वापसी सेवा, संवेदना और समर्पित देखभाल की ऐसी कहानी है, जो पोषण माह के संदेश को जन-जन तक पहुंचाती है। गंभीर कुपोषण की स्थिति से स्वस्थ जीवन की ओर बढ़े ओमेश की मुस्कान यह संदेश देती है कि समय पर पहचान, उपचार, पौष्टिक आहार और माताओं को सही जानकारी देकर बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन में सिविल सर्जन डॉ. वाय.के. ध्रुव, नोडल अधिकारी डॉ. अंकुश वर्मा, अस्पताल प्रबंधक डॉ. शंकर पटेल सहित आहार प्रदर्शनकर्ता अनीस अख्तर, स्टाफ नर्स डिगेश्वरी निषाद, खिलेश्वरी कंवर, मुनमुन देवांगन तथा रसोइया लक्ष्मी यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 

0
Show Comments (0) Hide Comments (0)
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Recent Posts:
Share
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x