अब आपके मन में सवाल आएगा कि जब चांदी सस्ती हो रही है तो कंपनी को प्लैटिनम की तरफ जाने की जरूरत ही क्या है? इसकी असली वजह आज की चांदी की कीमत नहीं, बल्कि आगे अपने मुनाफे को अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाना है. दुनिया की सबसे बड़ी ज्वेलरी कंपनी पैंडोरा ने चांदी को लेकर एतिहासिक बयान दिया है. सीएनबीसी इंटरनेशनल पर बात करते सीईओ बर्टा डी पाब्लोस-बार्बियर ने बताया कि वो चांदी नहीं खरीद रहे है. कंपनी अलग-अलग तरह के मटेरियल इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि कारोबार ज्यादा लचीला हो और ग्राहकों को भी ज्यादा ऑप्ळशन दिए जा सकें.
पहले Silver की कीमतों की कहानी समझिए
चांदी की कीमतों ने जनवरी में 120 डॉलर प्रति औंस से ऊपर का कई साल का ऊंचा स्तर छुआ था.इसके बाद तस्वीर तेजी से बदली.फरवरी में, जब पैंडोरा ने पहली बार प्लैटिनम-प्लेटेड ज्वेलरी की तरफ बढ़ने की योजना बताई थी, तब चांदी करीब 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास थी.अब गुरुवार को स्पॉट सिल्वर का भाव घटकर 65 डॉलर प्रति औंस से थोड़ा नीचे आ गया.जनवरी के 120 डॉलर से ज्यादा के ऊपरी स्तर के मुकाबले चांदी काफी सस्ती हो चुकी है.इसके बावजूद पैंडोरा ने अपनी योजना नहीं बदली.
आखिर Platinum पर दांव क्यों?
यहीं पूरी कहानी छिपी है.पैंडोरा सिर्फ यह नहीं देख रही कि आज चांदी का भाव क्या है. कंपनी की बड़ी चिंता यह है कि कीमती धातुओं की कीमतें बहुत तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती हैं.
इसे एक दुकानदार के उदाहरण से समझिए.मान लीजिए आप मिठाई बेचते हैं और आपकी सबसे बड़ी लागत दूध है. दूध ₹50 लीटर से अचानक ₹100 हो जाए तो या तो आपको मिठाई महंगी करनी पड़ेगी या अपना मुनाफा कम करना पड़ेगा. ज्वेलरी कंपनी के लिए चांदी की कीमतों में अचानक तेजी कुछ ऐसी ही परेशानी पैदा कर सकती है.इसीलिए पैंडोरा अलग-अलग मटेरियल का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है, ताकि पूरा कारोबार सिर्फ चांदी की कीमत पर ज्यादा निर्भर न रहे.
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है.कंपनी प्लैटिनम-प्लेटेड ज्वेलरी की बात कर रही है. इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी ज्वेलरी ठोस प्लैटिनम से बनाई जाएगी.प्लैटिनम-प्लेटेड का सीधा मतलब है कि ज्वेलरी के ऊपर प्लैटिनम की परत चढ़ाई जाती है. इसे पूरी तरह प्लैटिनम से बनी ज्वेलरी समझना सही नहीं होगा.
कंपनी को अपने Margin की चिंता
पैंडोरा की सीईओ पहले यह भी बता चुकी हैं कि इस बदलाव से कंपनी को अपना प्रॉफिट मार्जिन ऊंचा बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
अब मार्जिन क्या है?
मान लीजिए किसी सामान को बेचकर कंपनी को ₹100 मिले. उस सामान को बनाने और कारोबार चलाने का खर्च निकालने के बाद कंपनी के पास कितना पैसा बचता है, उससे मोटे तौर पर उसके मार्जिन का अंदाजा मिलता है.अगर कच्चे माल की कीमत अचानक बढ़ जाए तो यह बचत कम हो सकती है.पैंडोरा इसी जोखिम को लंबे समय के लिए कम करना चाहती है.
2027 की चांदी को लेकर कंपनी ने पहले ही किया इंतजाम
कंपनी ने चांदी की कीमतों के जोखिम से बचने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है.पैंडोरा ने बताया कि उसने 2027 में जरूरत पड़ने वाली करीब 90-100 फीसदी चांदी को लगभग 65 डॉलर प्रति औंस के भाव पर हेज कर लिया है.
अब हेजिंग को बिल्कुल आसान भाषा में समझिए.मान लीजिए आपको पता है कि छह महीने बाद घर में शादी है और आपको बड़ी मात्रा में सोना खरीदना है. आपको डर है कि तब तक सोना बहुत महंगा हो जाएगा. अगर कोई ऐसा तरीका हो जिससे आप आज ही भविष्य की खरीद का भाव काफी हद तक तय कर लें तो अचानक कीमत बढ़ने का जोखिम कम हो जाएगा.कारोबार में इसी तरह कीमतों के जोखिम को कम करने की व्यवस्था को हेजिंग कहा जाता है.पैंडोरा ने भी 2027 की अपनी चांदी की जरूरत का बड़ा हिस्सा करीब 65 डॉलर प्रति औंस के आसपास सुरक्षित किया है.
शेयर ने तीन महीने में लगाई 55% की छलांग
चांदी की कीमतों में गिरावट ने पैंडोरा को शेयर बाजार में भी राहत दी है.कमजोर 2025 के बाद कंपनी का शेयर पिछले तीन महीनों में करीब 55 फीसदी चढ़ चुका है.सिटी के जानकारों ने शेयर की इस वापसी की एक वजह हाल में चांदी की कीमतों में आई गिरावट को माना है. चांदी सस्ती होने से कंपनी की लागत को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है.गुरुवार सुबह कोपेनहेगन में पैंडोरा का शेयर करीब 4 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा था.
नतीजे भी उम्मीद से बेहतर
कंपनी के दूसरी तिमाही के नतीजों ने भी निवेशकों को राहत दी.पैंडोरा का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 1.46 अरब डेनिश क्रोन, यानी करीब 22.6 करोड़ डॉलर रहा. ऑपरेटिंग मार्जिन 20.3 फीसदी रहा.कंपनी को अमेरिका में टैरिफ से जुड़ा एक बार का रिफंड भी मिला, जिसने तिमाही मुनाफे को सहारा दिया.सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कंपनी ने पूरे 2026 के लिए अपना अनुमान बढ़ा दिया है.
पहले पैंडोरा को ऑर्गेनिक ग्रोथ माइनस 1 फीसदी से प्लस 2 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद थी. अब इसे बढ़ाकर 0 से 3 फीसदी कर दिया गया है.कंपनी ने पूरे साल के प्रॉफिट मार्जिन का अनुमान भी पहले के 21-22 फीसदी से बढ़ाकर 22-23 फीसदी कर दिया है.
तिमाही में ऑर्गेनिक ग्रोथ 3 फीसदी रही, जबकि लाइक-फॉर-लाइक ग्रोथ 1 फीसदी रही.लाइक-फॉर-लाइक को आसान भाषा में समझें तो इसमें नई खुली या बंद हुई दुकानों का असर हटाकर यह देखा जाता है कि पहले से चल रही दुकानों का कारोबार कैसा रहा.
कहानी का असली मतलब क्या है?
पैंडोरा का फैसला सिर्फ “चांदी छोड़कर प्लैटिनम अपनाने” की कहानी नहीं है.असल कहानी कंपनी के कारोबार को भविष्य में चांदी की कीमतों के झटकों से बचाने की है.आज चांदी 65 डॉलर के आसपास आ गई है. कल फिर तेजी से महंगी हो सकती है. कंपनी नहीं चाहती कि हर बार चांदी का भाव बढ़े तो उसके मुनाफे का गणित बिगड़ जाए.
इसीलिए एक तरफ कंपनी 2027 की लगभग पूरी चांदी की जरूरत को हेज कर चुकी है और दूसरी तरफ कुछ ज्वेलरी में प्लैटिनम-प्लेटेड विकल्प बढ़ाने की तैयारी कर रही है.
यानी चांदी अभी सस्ती जरूर हुई है, लेकिन पैंडोरा सिर्फ आज का भाव देखकर फैसला नहीं कर रही. कंपनी आने वाले कई साल का जोखिम कम करने की तैयारी में है.