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वापसी की उड़ान रद्द होने से 11 दिनों से परेशान यात्री, भारतीय अधिकारियों से लगाई जल्द स्वदेश लौटाने की गुहार

श्रीनगर। सऊदी अरब में कश्मीर के 36 उमराह यात्री पिछले 11 दिनों से फंसे हुए हैं। इनमें बुजुर्गों और महिलाओं की संख्या भी शामिल है। 13 अक्टूबर को वापसी की उड़ान रद्द होने के बाद से ये यात्री भारत नहीं लौट सके हैं। अब उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है, क्योंकि होटल में रहने, भोजन और जरूरी दवाइयों पर खर्च करने के लिए उनके पास पैसे कम पड़ने लगे हैं। यात्रियों ने भारतीय अधिकारियों से जल्द सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

जानकारी के मुताबिक, 50 यात्रियों का यह समूह 25 सितंबर को उमराह के लिए श्रीनगर से रवाना हुआ था। वापसी की इंडिगो उड़ान रद्द होने के बाद 36 लोग सऊदी अरब में ही रुक गए, जबकि अन्य 14 यात्रियों ने अपने खर्च पर दुबई के रास्ते भारत वापसी की।

महंगी उड़ानों ने बढ़ाई मुश्किलें

यात्रियों का कहना है कि जेद्दा से दुबई, मस्कट या कुवैत के रास्ते भारत लौटने के लिए प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। समूह के सदस्य वकार मीर के अनुसार, इतनी महंगी टिकट खरीदना उनके लिए संभव नहीं है।

अब तक यात्री अपनी बचत से होटल और खाने का खर्च उठा रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके पैसे खत्म हो रहे हैं। कुछ लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए परिचितों और अन्य यात्रियों से उधार लेना पड़ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि टूर ऑपरेटर से भी उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। वहीं, ऑपरेटर ने उड़ान रद्द होने को अपने नियंत्रण से बाहर की स्थिति बताया है।

बुजुर्ग यात्रियों की दवाइयों को लेकर चिंता

आर्थिक परेशानी के साथ समूह में शामिल बुजुर्गों की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। वकार मीर के मुताबिक, कुछ यात्रियों की नियमित दवाइयां खत्म होने वाली हैं। सऊदी अरब में दवाइयों की कीमत अधिक होने और कुछ दवाओं के लिए स्थानीय डॉक्टर का पर्चा जरूरी होने से परेशानी और बढ़ गई है।

यात्रियों ने यह भी बताया कि अनिश्चितता और लगातार बदलती उड़ानों की तारीखों के कारण कुछ लोगों को घबराहट और बेचैनी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब तक उन्हें घर लौटने का कोई निश्चित विकल्प नहीं मिल पाया है।

भारतीय अधिकारियों से मदद की अपील

यात्रियों के अनुसार, भारतीय दूतावास से संपर्क करने पर उन्हें टूर ऑपरेटर से बात करने की सलाह दी गई। उन्हें सऊदिया, फ्लाइनास और एमिरेट्स जैसी विमानन कंपनियों से टिकट लेने या दूसरे देशों के रास्ते भारत लौटने के विकल्पों पर विचार करने को कहा गया है।

हालांकि, यात्रियों का कहना है कि वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करना उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर है। ऐसे में उन्होंने भारतीय अधिकारियों से विशेष सहायता और जल्द वापसी की व्यवस्था करने की मांग की है।

विदेश मंत्रालय ने वापसी के प्रयासों की दी जानकारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा में भारतीय वाणिज्य दूतावास यात्रियों की वापसी के लिए विमानन कंपनियों और टूर ऑपरेटरों के संपर्क में हैं।

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब में फंसे करीब 3,000 उमराह यात्रियों को भारत वापस लाया गया है। इसके अलावा 10,000 से अधिक नियमित यात्रियों ने भी उपलब्ध उड़ानों के जरिए वापसी की है। शेष यात्रियों को वापस लाने के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा जारी है।

फिलहाल, कश्मीर के इन 36 यात्रियों को अपनी वापसी का इंतजार है। उनकी सबसे बड़ी चिंता रहने और खाने के खर्च के साथ जरूरी दवाइयों की उपलब्धता है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी उनकी सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए क्या कदम उठाते हैं।

वापसी की उड़ान रद्द होने से 11 दिनों से परेशान यात्री, भारतीय अधिकारियों से लगाई जल्द स्वदेश लौटाने की गुहार

श्रीनगर। सऊदी अरब में कश्मीर के 36 उमराह यात्री पिछले 11 दिनों से फंसे हुए हैं। इनमें बुजुर्गों और महिलाओं की संख्या भी शामिल है। 13 अक्टूबर को वापसी की उड़ान रद्द होने के बाद से ये यात्री भारत नहीं लौट सके हैं। अब उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है, क्योंकि होटल में रहने, भोजन और जरूरी दवाइयों पर खर्च करने के लिए उनके पास पैसे कम पड़ने लगे हैं। यात्रियों ने भारतीय अधिकारियों से जल्द सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

जानकारी के मुताबिक, 50 यात्रियों का यह समूह 25 सितंबर को उमराह के लिए श्रीनगर से रवाना हुआ था। वापसी की इंडिगो उड़ान रद्द होने के बाद 36 लोग सऊदी अरब में ही रुक गए, जबकि अन्य 14 यात्रियों ने अपने खर्च पर दुबई के रास्ते भारत वापसी की।

महंगी उड़ानों ने बढ़ाई मुश्किलें

यात्रियों का कहना है कि जेद्दा से दुबई, मस्कट या कुवैत के रास्ते भारत लौटने के लिए प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। समूह के सदस्य वकार मीर के अनुसार, इतनी महंगी टिकट खरीदना उनके लिए संभव नहीं है।

अब तक यात्री अपनी बचत से होटल और खाने का खर्च उठा रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके पैसे खत्म हो रहे हैं। कुछ लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए परिचितों और अन्य यात्रियों से उधार लेना पड़ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि टूर ऑपरेटर से भी उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। वहीं, ऑपरेटर ने उड़ान रद्द होने को अपने नियंत्रण से बाहर की स्थिति बताया है।

बुजुर्ग यात्रियों की दवाइयों को लेकर चिंता

आर्थिक परेशानी के साथ समूह में शामिल बुजुर्गों की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। वकार मीर के मुताबिक, कुछ यात्रियों की नियमित दवाइयां खत्म होने वाली हैं। सऊदी अरब में दवाइयों की कीमत अधिक होने और कुछ दवाओं के लिए स्थानीय डॉक्टर का पर्चा जरूरी होने से परेशानी और बढ़ गई है।

यात्रियों ने यह भी बताया कि अनिश्चितता और लगातार बदलती उड़ानों की तारीखों के कारण कुछ लोगों को घबराहट और बेचैनी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब तक उन्हें घर लौटने का कोई निश्चित विकल्प नहीं मिल पाया है।

भारतीय अधिकारियों से मदद की अपील

यात्रियों के अनुसार, भारतीय दूतावास से संपर्क करने पर उन्हें टूर ऑपरेटर से बात करने की सलाह दी गई। उन्हें सऊदिया, फ्लाइनास और एमिरेट्स जैसी विमानन कंपनियों से टिकट लेने या दूसरे देशों के रास्ते भारत लौटने के विकल्पों पर विचार करने को कहा गया है।

हालांकि, यात्रियों का कहना है कि वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करना उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर है। ऐसे में उन्होंने भारतीय अधिकारियों से विशेष सहायता और जल्द वापसी की व्यवस्था करने की मांग की है।

विदेश मंत्रालय ने वापसी के प्रयासों की दी जानकारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा में भारतीय वाणिज्य दूतावास यात्रियों की वापसी के लिए विमानन कंपनियों और टूर ऑपरेटरों के संपर्क में हैं।

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब में फंसे करीब 3,000 उमराह यात्रियों को भारत वापस लाया गया है। इसके अलावा 10,000 से अधिक नियमित यात्रियों ने भी उपलब्ध उड़ानों के जरिए वापसी की है। शेष यात्रियों को वापस लाने के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा जारी है।

फिलहाल, कश्मीर के इन 36 यात्रियों को अपनी वापसी का इंतजार है। उनकी सबसे बड़ी चिंता रहने और खाने के खर्च के साथ जरूरी दवाइयों की उपलब्धता है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी उनकी सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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