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अनंत चतुर्दशी पर ही क्यों होता है गणपति विसर्जन? जानिए धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक संदेश

गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला 10 दिवसीय गणेश उत्सव अनंत चतुर्दशी के साथ संपन्न होता है। इस दिन भक्त ढोल-नगाड़ों, भजन और जयकारों के बीच गणपति बप्पा को विदाई देते हैं। घरों और पंडालों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

लेकिन सवाल यह है कि गणपति विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी का दिन ही क्यों चुना गया? इसके पीछे धार्मिक परंपराओं के साथ जीवन और प्रकृति से जुड़ा आध्यात्मिक भाव भी माना जाता है।

अनंत चतुर्दशी का क्या है महत्व?

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर अनंत सूत्र धारण करते हैं और व्रत-पूजन करते हैं।

गणेश चतुर्थी पर गणपति की स्थापना के बाद अलग-अलग परंपराओं के अनुसार डेढ़ दिन, तीन, पांच, सात या दस दिनों तक पूजा की जाती है। दस दिवसीय उत्सव मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अनंत चतुर्दशी गणपति उत्सव के समापन और विसर्जन का प्रमुख दिन होता है।

विसर्जन में छिपा है प्रकृति का संदेश

गणपति विसर्जन को केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की रस्म के रूप में नहीं देखा जाता। पारंपरिक रूप से मिट्टी से बनाई गई गणेश प्रतिमा स्थापना के बाद पूजित होती है और उत्सव पूरा होने पर उसी प्रकृति में वापस लौटा दी जाती है, जिससे उसका निर्माण हुआ था।

इस परंपरा को जीवन के चक्र का प्रतीक माना जाता है। संदेश यह है कि संसार में कोई भी भौतिक स्वरूप स्थायी नहीं है। प्रकृति से उत्पन्न हर वस्तु अंततः प्रकृति में ही विलीन होती है।

बप्पा की विदाई के साथ परेशानियों को छोड़ने की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में गणपति को विघ्नहर्ता कहा गया है। इसी भाव के चलते विसर्जन के समय भक्त यह कामना करते हैं कि गणपति बप्पा अपने साथ जीवन के विघ्न, दुख और नकारात्मकता भी ले जाएं।

इसलिए विसर्जन को भगवान गणेश की विदाई के साथ नई ऊर्जा, सकारात्मकता और शुभ शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। बप्पा को विदा करते समय भक्त अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं।

महाभारत से जुड़ी है एक प्रचलित कथा

गणपति विसर्जन से जुड़ी एक प्रचलित कथा महर्षि वेदव्यास और भगवान गणेश से संबंधित है। मान्यता के अनुसार वेदव्यास ने भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनाई और गणेश जी लगातार दस दिनों तक उसे लिखते रहे।

कथा के अनुसार लगातार लेखन के कारण गणेश जी के शरीर का तापमान बढ़ गया था। इसके बाद वेदव्यास ने उन्हें ठंडक प्रदान करने के लिए जल में स्नान कराया। इसी प्रसंग को गणेश उत्सव के दस दिनों और उसके बाद होने वाले विसर्जन से जोड़कर देखा जाता है।

2026 में 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी

वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जा रही है। इसी दिन दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होगा और कई स्थानों पर श्रद्धालु गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे।

विसर्जन के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ भक्त अपने आराध्य को विदाई देंगे। यह विदाई केवल उत्सव के समापन का अवसर नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और जीवन के चक्र को याद करने का भी समय मानी जाती है।

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