मुंबई: 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI व्यापारी लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने जा रहा है। इसी फैसले को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस व्यवस्था को व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए ‘डिजिटल ट्रैप’ बताया है।
राज ठाकरे ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि सरकार ने पहले UPI को बढ़ावा दिया और लोगों को डिजिटल भुगतान की ओर आकर्षित किया। अब कुछ लेनदेन पर शुल्क लगाने का फैसला किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि UPI के संचालन, रखरखाव और साइबर सुरक्षा के लिए लगातार खर्च होना था, तो इसके लिए पहले से स्थायी वित्तीय व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई।
2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा। यह शुल्क व्यापारी पक्ष पर लगाया जाएगा। वहीं, Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांसफर पर MDR लागू नहीं होगा।
सरकार की व्यवस्था के मुताबिक ग्राहकों से सीधे यह MDR वसूलने का प्रावधान नहीं है। बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को व्यापारी पर लगने वाले शुल्क को ग्राहक तक ट्रांसफर करने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
राज ठाकरे ने क्यों जताई आपत्ति?
राज ठाकरे का कहना है कि UPI जैसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक चलाने के लिए सरकार को बजट में स्थायी प्रावधान करना चाहिए था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शुल्क व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार ने किन पक्षों से बातचीत की और इस मॉडल को चुनने की जरूरत क्यों पड़ी।
उन्होंने व्यापारियों से नए MDR का विरोध करने की अपील भी की है। यह उनका राजनीतिक रुख है; वहीं सरकार की ओर से शुल्क व्यवस्था को डिजिटल भुगतान ढांचे को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने और उसके विस्तार के लिए जरूरी बताया गया है।
क्या ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर?
फिलहाल नियम के अनुसार MDR का भुगतान व्यापारी पक्ष करेगा और ग्राहक से अलग से MDR लेने की अनुमति नहीं है। हालांकि, राज ठाकरे ने सवाल उठाया है कि व्यापारी भविष्य में इस लागत को किसी अन्य तरीके से ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं या नहीं और इसकी निगरानी कैसे होगी।
UPI पर क्यों हो रहा है विवाद?
UPI पर शुल्क लागू करने का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से छोटे डिजिटल भुगतानों पर शून्य MDR व्यवस्था रही है। सरकार का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को चलाने में लगातार लागत आती है और नई व्यवस्था का उद्देश्य इस सिस्टम के लिए अधिक टिकाऊ वित्तीय मॉडल तैयार करना है। दूसरी ओर, आलोचकों ने व्यापारियों की लागत और डिजिटल भुगतान की आदतों पर संभावित असर को लेकर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें स्पष्ट हैं—15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा और सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI ट्रांसफर इस शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।