तिमाही पत्रिका

छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़ी-छत्तीसगढ़िया

भरथरी गायिका रेखा जलक्षत्रीय संग विजय मिश्रा ‘अमित’ के मुंहचाही
महतारी खाइस चेन के मार, फेर टूटीस नहीं भरथरी के धार – रेखा जलक्षत्रीय
“छत्तीसगढ़ी लोककला लोकोन्मुखी हे। जेखर पोठ रोंठ थाथी ल साजे संवारे खातिर कतकोन कलाकार अपन जिनगी के हूम देहें हावयं। तभो ले जबड़ कमाई- धमाई अउ प्रचार- प्रसार के मामला म लोक कलाकार मन के ज्यादा पूछारी आजो नी होय।” ए बिचार हर छत्तीसगढ़ के नामी भरथरी लोकगायिका रेखा जलक्षत्रीय के आय।
उंखर संग राजधानी रायपुर के घासीदास संग्रहालय के अंगना म भेंट होइस।जिहां छत्तीसगढ़ी लोककला ल बड़हर देहे बर अउ नवा पीढ़ी के कलाकार मन ल जोड़े खातिर संस्कृति विभाग हर “सीखे सिखाए” के सिविर लगाए रहिस। उंहचे गोठ- बात करत रेखा जी ल पूछेंवं कि सहर म लोककला सिविर लगाए के कोनो फायदा दिखथे का? त वो बोलिन- नंदावत कला संस्कृति के बीजा ल सहरिया लइका मन के भीतर बोना जरूरी हे। इहां बगरही तभे लोककला म नवा जान फूंकाही।काबर कि गांव म तो लोककला के गंगा हर बोहातेच हे।सहर म तको लोकधारा बोहवत रहय अइसन उदिम जरूरी हे। गरब के बात आए कि गावं – सहर के लइका मन भरथरी,पंडवानी सीखे बर गजब के ललक देखावत हें।
लोककला के जरी हे पोठ,नंदावय नहीं
वाह ए तो बने बात आए। फेर कतको झन कहिथें कि हमर लोकगीत -संगीत- परंपरा हर नंदा जाही……। मोर बात ल बीचे म काटत रेखा जी कहिन – अइसन कभु नी हो सकय महाराज।काबर कि बर पेड़ के जरी कस हमर लोककला संस्कृति हर जनमन म समाए हे। आप तो देखे हव हवा गरेर के चपेट म डारा पाना टूटबेच करथे।फेर जरी ह मजबूत रहिथे त पेड़ हर ठाढ़े रहिथे।हमर लोककला के जरी हर जबड़ मजबूत हे।एहर अउ फलय फूलय एखर जवाबदारी नवा पीढ़ी के खांद म हावय।जेन मन करा हमर ले जादा मौका- मंच – मीडिया हावय।अपन पूरखा के गुन ल सुन सीख के ओमन हर कला ल नंदावन नी देवंय। मोला भरोसा हे।
रेखा जी तूंहर भरोसा हमर भरोसा आए। सही म एहर बड़ा गुमान के बात तको आए। फेर एला तो बतावव कि आपके चरन लोककला जगत म कहां, कइसे परिस ? ए सवाल ल सुनके पहली तो रेखा जी खलखला के हांसिन।फेर बताइन- मोर जनम सीमेंट नगरी मांढर म 14 जून 1956 म गरीब परिवार म होए रहीस। हमतारी जामवंती, ददा बिष्णु के कोरा म खेलत कूदत बाढ़ेवं। नानपन म तोतरी रहेवं। लोगन मोला ‘तोतो’ कहयं। फेर मोर गायिकी म मिठास रहीस।अउ नाचे- गाए- बजाए के चलन तो हमर समाज के पहचान आय। ए पुस्तैनी गुन ल पाके दसे बछर के उमर ले नचाई – गवई संग मोर नता जुड़गे रहीस।
भरथरी गुरु बनीस दादा मेहतर
वाह इही ल कहिथें पूत के पावं पालना म दिख जाथे।अच्छा ए बतावव रेखा जी लोक मंच के रद्दा म रेंगत रेंगत भरथरी के तमूरा ल कइसे थाम लेव?एखर जवाब देवत रेखा जी बताइन- उज्जैन के राजा भर्तृहरि के गाथा ल भरथरी म गाय जाथे। अइसे माने जाथे कि भर्तरी गायन विधा के जनम देवइया छपरा के महादेव आरा जी हर आएं। लोकवाद्य चिंकारा, करताल, हारमोनियम, तबला,के उपयोग एमा होथे। मोला भरथरी के भान- गियान मोर दादा मेहतर प्रसाद ले होइस।उही हर गुरू बनके मोला भरथरी गायन म राजा भरथरी के जिनगी के बैराग, बियोग, भिक्छा, बिहाव कस कतको प्रसंग ल सिखोइस। भरथरी गायन के बेरा म दया, सिंगार,भय,बीर,हास्य रस के भाव -भंगिमा ल देखाना परथे। ते पाय के गायन संग एकल अभिनय (मोनो प्ले ) के गुन पंडवानी,भरथरी, चंदैनी,ढोला- मारू, आल्हा-ऊदल गायक कलाकार म होना चाही। पंडवानी गायिका दीदी तीजन बाई अऊ भरथरी गायिका सुरूज बाई खांडे जी के इही खास पहिचान आए।
पंदोली पाके अगासदिया कस चढ़ीस भरथरी कला हर
आपके जनमजात गुन ल अगासदिया कस ऊपर चघाए म अउ काखरो पंदोली मिलीस का पूछेवं त रेखा जी बताइन- महराज जी ,मोला ऊपर बढ़े चढ़े बर सरगनिसेनी कस पद्मलोचन जायसवाल जी अउ आकासवानी के बरसाती भइया केसरी प्रसाद बाजपेई जी मिलीन।उही मन ह इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ म गायन के मौका देवाइन।उहां मोर कला ल देखे के पाछु शरीफ सर, आशा खरे मन ह मोला आदिवासी लोक कला परिषद भोपाल के मंच म मौका देवाइन। जेन ल देख- परख के डॉ भावसार अउ निर्गुणी सर हर संगीत नाटक अकादमी दिल्ली म मंच देवाइस। तहां ले मोर कला हर छत्तीसगढ़ के चौखट ल नाहक के देश अउ बिदेस म बगरत चल दिस।
बिदेसी मन ह चुमें त लागय बड़ लाज
मांढर के माटी ले निकल के भरथरी के भभूति ल कहां कहां बगराए हव अउ कइसे कइसे अनुभव मिलीस कहेवं त रेखा जी बताइन- भरथरी गायन ल महानगर दिल्ली, कलकत्ता सहित नागपुर जोन दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र महाराष्ट्र ,उत्तर सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद के बूते देस-बिदेस म देखाय हवं।
पटना म तो नामी भोजपुरी गायिका सारदा सिन्हा हर मोला पोटार के मन भर मया आसीस देहे रहीस।फिलीम कलाकार मिथुन चक्रवर्ती जी के दुलार मिलीस।हबीब तनवीर जी के संग प्रस्तुति देहे के मौका मिलीस।बिदेस (जर्मनी मास्को) म तो मोला दीदी बहिनी मन पोटार के चूम देवत रहीन।ओ बेरा बिकट लाज लागय महराज जी।
राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ले मिलीस ईनाम
भरथरी गायन म महारथ के सुफल आय मोला दिल्ली म राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा अउ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ले उदयपुर म सम्मान मिलीस। ईनाम के कतेक बखान करवं।लमबा सूची हावय।फेर मोर कहना हे सरकार ल चाही कि बड़े उमर के कलाकार मन ल खोज खोज के मान सम्मान देवय।
गरीब ल धीरजवान धनवान ल दयावान
बात ल बढ़ावत रेखा जी ल बोलेवं राजा भरथरी के दुःख पीरा ल सुनावत दुनिया भर म किंजरत रहिथो।दुनिया ल लेके आपके मन म का बिचार हे? तब ओ बोलिन -दुनिया म मनखे के दू पहिचान गरीब अउ धनवान होथे ।फेर मोर कहना कि गरीब मनखे ल धीरजवान अउ पूंजीपति ल दयावान होना चाही। दुनिया म चलत भेदभाव बर कबीर दास जी लिखे हावयं ” निर्धन गिरे पर्वत से कोई ना पूछे हाल, धनी को कांटा लगे पूछें लोग हजार”
महतारी मार खाईस चेन म
अतका सुनके में हर वाह वाह कहत पूछेवं- रेखा जी, आपके जिनगी के कुछू दुःख पीरा ल बताहू का?मोर सवाल सुनके उंखर आंखी डबडबा गिस।आंसू पोंछत ओ बताइन – महराज ,मैं हर दुःख सागर म कई घवं बूड़े हवं। हलाकांन होए हवं। एक घवं तो मोर नचई गवई के बिरोध करत हमर समाज के लोगन मोर महतारी ल लोहा के चेन म मार मार के अधमरा कर देहे रहीन।तभो ले मोर कला यात्रा नी थमीस। आज उही समाज हर मान देवत मोला माला पहिनाए म गरब करथे।तब सरसती माई ल सुमिरत कहिथों “सरसती के दास होवय नहीं उदास”।
चारी चुगली ले दूरिहा रहयं कलाकार
रेखा जी तूंहर बात हर सोला आना सही आए। तूंहर कांटा भरे जिनगी म लोक कला हर उछाह बनाके राखे हावय।अपन ए कला यात्रा म का सीखेव बने फोर के बताहू कहेवं त वो बड़ सुग्घर बात बताइन – कलाकार हर अपन जिनगी म सदा दिन मुसीबत के मोहाटी म ठाढ़े रहिथे। इही पाए के कलाकार हर आगी म तीपे सोन कस जगमगाथे।जिनगी के बदतर हालत म तको सपना ल पोसत ओहर नवा इतिहास रंचथे। जेन हर इतिहास नी रंचे पाए तेन ह साजिश रंचथे है।अइसन दोगला मन ले बांचत कलाकार मन ल काखरो साजिस चारी चुगली के डारा फांदा ले दूरिहा अपन सपना ल पूरा करे म डटे रहना चाही,तभे सफलता के नवा नवा दुवार खुलही।
अतका बात होय के पाछु दार भात चूरगे मोर किस्सा पूरगे कहत रेखा जी संग गोठ- बात ल खतम करेन त मन म एके बिचार आइस कि- जेन हर बरसा के पानी म भींजथे तेन हर अंगक्खा ल बदलथे।अउ जेन हर पछीना म भींजथे तेन हर इतिहास ल बदलथे
विजय मिश्रा ‘अमित’ वरिष्ठ हिंदी लोक रंगकर्मी अग्रोहा कॉलोनी पोऑ- सुंदर नगर रायपुर (छग) 492013
मो.9893123310

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