भारत में सोने के बदले कर्ज (Gold Loan) लेने का चलन इन दिनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सोने की बढ़ती कीमतों और बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) द्वारा आसानी से कर्ज उपलब्ध कराने के कारण यह सेक्टर तेजी से फैल रहा है। हालांकि, इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे एक गंभीर चिंता भी उभरकर सामने आ रही है—क्या लोग सचमुच अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सोना गिरवी रख रहे हैं, या फिर पहले से लिए गए अन्य कर्जों (जैसे पर्सनल लोन) की किस्तें चुकाने के लिए मजबूरी में नया गोल्ड लोन ले रहे हैं?
1. आंकड़ों में गोल्ड लोन की बूम और रफ्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, देश में गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से बढ़ा है:
- बैंकों का कर्ज: RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक बैंकों का सोने के गहनों के बदले दिया गया कर्ज सालाना आधार पर 88.1% बढ़कर 5.52 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 31 अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा लगभग 5.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
- NBFC की हिस्सेदारी: NBFC कंपनियों का गोल्ड लोन बढ़कर 3.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें सालाना आधार पर 69% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- भविष्य का अनुमान: ICRA की हालिया रिपोर्ट का अनुमान है कि यह बाजार अगले दो वर्षों में 30% से अधिक बढ़कर मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है।
2. असली चिंता: “पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज”
गोल्ड लोन के इस बड़े विस्तार के बीच वित्तीय विशेषज्ञों और रेटिंग एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा ऐसे ग्राहकों से आ रहा है जो वित्तीय तनाव में हैं।
- पिरामल फाइनेंस के आंकड़े: वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इंडस्ट्री में बांटे गए कुल गोल्ड लोन में से 15% से 23% तक ऐसे ग्राहकों को दिए गए, जो कम से कम एक अन्य लोन की किस्त 90 दिनों से ज्यादा समय से डिफ़ॉल्ट कर चुके थे। रॉयटर्स के अनुसार ऐसे प्रभावित कर्ज की कुल रकम लगभग 4.7 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
- मैक्वेरी और अन्य कंपनियों की चेतावनी: मैक्वेरी ने चिंता जताई है कि कई मामलों में रिकवरी एजेंट खुद ग्राहकों को बकाया चुकाने के लिए नया गोल्ड लोन लेने का सुझाव दे रहे हैं। बजाज फाइनेंस और पिरामल फाइनेंस ने भी कर्जदारों की भुगतान क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
- चक्रव्यूह जैसा खतरा: यदि कोई व्यक्ति पर्सनल लोन की किस्तें न चुका पाने के कारण सोना गिरवी रखकर नया गोल्ड लोन ले लेता है, तो इससे तात्कालिक रूप से पुराना बकाया तो चुक जाता है, लेकिन अगर उसकी आय में बढ़ोतरी नहीं हुई तो भविष्य में नए गोल्ड लोन की किस्त चुकाना और भी मुश्किल हो जाता है।
3. क्या गोल्ड लोन लेना सचमुच जोखिम भरा है?
अपने मूल रूप में गोल्ड लोन एक सुरक्षित और आपातकालीन वित्तीय साधन है।
- सकारात्मक पहलू: परिवार की अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा, या छोटे कारोबारियों द्वारा रोजमर्रा की कार्यशील पूंजी (Working Capital) जुटाने के लिए यह बेहद मददगार है। इसके अलावा, बिना गारंटी (Unsecured) वाले पर्सनल लोन की तुलना में इसमें कर्जदाता के डूबने का जोखिम कम होता है, क्योंकि डिफॉल्ट होने पर बैंक सोना नीलाम कर सकता है।
- कीमतों में गिरावट का जोखिम: यदि वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में अचानक भारी गिरावट आती है और बड़ी संख्या में ग्राहक लोन चुकाना बंद कर देते हैं, तो बैंकों और NBFC के लिए सिर्फ सोना नीलाम करके पूरी रकम वसूलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
4. RBI के नए कड़े नियम (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी)
बाजार के जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) ने जून 2025 में नए निर्देश जारी किए थे, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं:
- लोन-टू-वैल्यू (LTV) लिमिट:
- 2.5 लाख रुपये तक का कर्ज: सोने की कीमत का अधिकतम 85% तक।
- 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक का कर्ज: अधिकतम 80% तक।
- 5 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज: अधिकतम 75% तक।
- अवधि सीमा: व्यक्तिगत जरूरतों के लिए एकमुश्त (Bullet repayment) चुकाए जाने वाले गोल्ड लोन की अधिकतम अवधि 12 महीने तय की गई है।
5. नई कंपनियों की एंट्री और बाजार की होड़
गोल्ड लोन बाजार के मुनाफे को देखते हुए कई बड़े वित्तीय संस्थान इस क्षेत्र में तेजी से उतर रहे हैं:
- टाटा कैपिटल ने योगक्षेमम लोन्स में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी।
- गोदरेज कैपिटल ने कनकदुर्गा फाइनेंस का गोल्ड लोन कारोबार अपने हाथ में ले लिया।
- आदित्य बिड़ला कैपिटल और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) फाइनेंस भी सैकड़ों नई गोल्ड लोन शाखाएं खोलने की योजना पर काम कर रही हैं।