मासिक पत्रिका

छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़ी-छत्तीसगढ़िया

बिहार में प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, शिक्षकों को 7वां वेतन आयोग और युवाओं को नौकरी का वादा

 

हाजीपुर: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने रविवार को हाजीपुर में आयोजित ‘शिक्षक संवाद’ कार्यक्रम में बिहार के शिक्षकों और युवाओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि इस बार बिहार में लोग राजनीतिक पद और प्रतिष्ठा देखकर नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य, रोजगार और शिक्षकों की समस्याओं को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज ने लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों के लिए 7वें वेतन आयोग का लाभ सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को उनका अधिकार दिलाना और शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

शिक्षकों को 7वें वेतन आयोग का लाभ दिलाने का दावा

प्रशांत किशोर ने बताया कि वैशाली जिले के शिक्षक 7वें वेतन आयोग के वेतनमान को लागू करने के मुद्दे पर चर्चा के लिए एकत्र हुए थे। उन्होंने कहा कि इस बार का चुनाव केवल सरकार बनाने या गिराने के लिए नहीं होगा, बल्कि मौजूदा सरकार को उसके काम के लिए जवाबदेह ठहराने का मौका होगा।

उन्होंने कहा कि इस बार वोट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिहार के शिक्षकों को 7वें वेतन आयोग का लाभ मिले, ‘अनएडेड’ शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिले।

10 हजार युवाओं को रोजगार का वादा

प्रशांत किशोर ने जन सुराज के ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार इंजीनियर मोहन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर मोहन चुनाव जीतते हैं, तो तिरहुत क्षेत्र में कम से कम 10 हजार शिक्षित बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने की जिम्मेदारी जन सुराज की होगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षित युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी खत्म करने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

‘अपने अधिकार और बच्चों के भविष्य को देखकर वोट करें’

प्रशांत किशोर ने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने अधिकारों और अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करें। उन्होंने कहा कि तिरहुत क्षेत्र के ग्रेजुएट युवाओं और शिक्षकों को भी बेहतर अवसर और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

उनका कहना था कि चुनाव में जाति, पद या राजनीतिक समीकरण के बजाय शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दे केंद्र में होने चाहिए।

विरोध-प्रदर्शन को लेकर सरकार पर निशाना

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की कथित टिप्पणी पर भी प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोगों की नाराजगी केवल किसी एक राजनीतिक दल या संगठन तक सीमित नहीं है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि शिक्षा, पेपर लीक, बेरोजगारी और चुनावी प्रक्रिया को लेकर समाज में जो असंतोष है, वही सड़कों पर दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, सरकार आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों को दबाकर इस असंतोष को खत्म नहीं कर सकती।

‘आंदोलन आगे भी जारी रहेगा’

प्रशांत किशोर ने कहा कि चाहे आंदोलन में विपक्षी गठबंधन, छात्र संगठन या आम लोग शामिल हों, विरोध जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस की तैनाती से लोगों को कुछ समय के लिए सड़कों पर आने से रोका जा सकता है, लेकिन इससे आंदोलन खत्म नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि जब तक सरकार शिक्षा, बेरोजगारी और चुनावी सुधार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाती और युवाओं को भरोसा नहीं दिलाती कि ऐसी समस्याएं दोबारा नहीं होंगी, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेंगे।

0
Show Comments (0) Hide Comments (0)
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Recent Posts:
Share
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x