तिमाही पत्रिका

छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़ी-छत्तीसगढ़िया

वंदे मातरम् विवाद पर कंगना का पलटवार, बोलीं- कला और कविता को धर्म की संकीर्ण नजर से न देखें

देश भर में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के छंदों को लेकर शुरू हुई बहस अब बॉलीवुड के गलियारों में भी जोर पकड़ चुकी है। दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की एक हाल ही की टिप्पणी पर एक्ट्रेस और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कला और कविता को धार्मिक नजरिए से देखने की प्रवृत्ति पर गहरी हैरानी जताई है।

कविता और कला को रीति-रिवाज से अलग रखने की बात
कंगना ने अपने पोस्ट में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस अमर कृति का महत्व रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। लेखक ने इसके जरिए देशवासियों को अपने अंदर की आंतरिक शक्ति को जगाने का आह्वान किया था। इतनी महान कलात्मक रचना को महज एक धार्मिक अनुष्ठान या रीति-रिवाज तक सीमित कर देना बिल्कुल उचित नहीं है।

अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए कंगना रनौत ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण दिया। उन्होंने लिखा कि विवेकानंद जी ने एक बार ऐसे युवाओं की मांग की थी जिनकी हड्डियां लोहे की और नसें बिजली जैसी हों। वे कोई मौसम का अनुमान नहीं लगा रहे थे, बल्कि देश में चेतना और शक्ति के उदय की बात कर रहे थे। उन्होंने सभी से हिंदू-मुस्लिम की संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठने की अपील की और कहा कि एक ईश्वर को मानने वाले भी शक्ति शब्द का सम्मान करते हैं।

इस पूरे मामले की जड़ें राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी हुई हैं। हाल ही में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने साल 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था, जिसके तहत उनके कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले 2 छंद ही गाए जाते हैं। इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। इसके बाद ही शर्मिला टैगोर की टिप्पणी आई और अब कंगना के जवाब ने इस मुद्दे को मनोरंजन जगत में भी गर्मा दिया है।

0
Show Comments (0) Hide Comments (0)
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Recent Posts:
Share
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x