पीस बॉन्ड की सुनवाई के दौरान आवासीय पते के प्रमाण का मामला आया सामने, दस्तावेज जमा करने के लिए अदालत से मांगा गया समय
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास ने दिल्ली में अपने निवास के प्रमाण को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आलोचकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दक्षिणपंथी आलोचक जल्द ही उन्हें दूसरे ग्रह से आया हुआ एलियन भी साबित करने लगेंगे।
यह विवाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट में पीस बॉन्ड यानी शांति बनाए रखने के मुचलके से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान सामने आया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान सौरव दास से दिल्ली में उनके वर्तमान आवासीय पते की पुष्टि करने वाले दस्तावेज पेश करने को कहा गया था।
सोशल मीडिया पर दावों के बाद दिया जवाब
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि सौरव दास अदालत के समक्ष दिल्ली में निवास का पर्याप्त प्रमाण, जैसे किरायानामा या लीज से संबंधित दस्तावेज, प्रस्तुत नहीं कर सके।
इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में तंज कसा। उन्होंने लिखा, “ये दक्षिणपंथी ‘अंधभक्त’ जल्द ही यह साबित कर देंगे कि मैं नेपच्यून से आया हुआ कोई एलियन हूं!”
अदालत में पते से जुड़े दस्तावेजों पर चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (नई दिल्ली) ऋतु राज ने सौरव दास की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों पर गौर किया। बताया गया कि उपलब्ध दस्तावेज दिल्ली में उनके पते की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं माने गए।
इसके बाद सौरव दास की कानूनी टीम ने आवश्यक दस्तावेज पेश करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित बताई गई है।
सुनवाई के दौरान सीजेपी नेता आशुतोष रांका भी अदालत में मौजूद थे।
जंतर-मंतर मामले में हिरासत के बाद मिली थी रिहाई
सौरव दास और आशुतोष रांका को कथित तौर पर 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जबरन तिरंगा फहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों करीब एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे और 21 अक्टूबर को पीस बॉन्ड की शर्तों के साथ उन्हें रिहा किया गया।
फिलहाल, सौरव दास के दिल्ली स्थित आवासीय पते से जुड़े दस्तावेजों का मुद्दा कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में आगे की स्थिति अगली सुनवाई के दौरान स्पष्ट होने की उम्मीद है।