दिल्ली हाई कोर्ट में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की छात्र नेता नेहा बोरा की याचिका पर गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस द्वारा शांति बॉन्ड (Peace Bond) भरने के लिए जारी किए गए नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार शाम 6 बजे फैसला सुनाया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान मुख्य बिंदु और दलीलें
- कनॉट प्लेस प्रदर्शन से दूरी: सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शंकरनारायणन ने स्पष्ट किया कि उनकी मुवक्किल का कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने कहा कि नेहा अपने अलग आह्वान के तहत मंडी हाउस में बैठक आयोजित करने के मामले से जुड़ी थीं।
- लोकतांत्रिक विरोध और भाषण: वकील ने दलील दी कि लोकतंत्र में सरकार के कामकाज का विरोध करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है। नेहा ने कभी भी अपने भाषणों में हिंसा के लिए नहीं उकसाया, उनके भाषण हमेशा शांतिपूर्ण और संतुलित रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि देश में तिरंगा फहराने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
- पुलिस का नोटिस और आपत्तियां: नेहा बोरा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा जारी शांति बॉन्ड के नोटिस को रद्द करने और कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने की मांग की है। वहीं, दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में इस याचिका की सुविधा और विचारणीयता (Maintainability) पर आपत्ति जताई है।
क्या है पूरा मामला?
नेहा बोरा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल रही हैं। इसी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधि के चलते दिल्ली पुलिस ने उन्हें शांति बॉन्ड भरने का नोटिस जारी किया था, जिसके खिलाफ उन्होंने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।