कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जेल में बंद पार्टी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट साझा किया है। उन्होंने दोनों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपने निजी हितों से ऊपर उठकर उन लोगों के लिए संघर्ष करने का रास्ता चुना, जिन्हें बेहतर जिंदगी और न्याय की जरूरत है।
दीपके के मुताबिक, आशुतोष रांका कुछ साल पहले तक लंदन में एक अच्छी तनख्वाह वाली कॉर्पोरेट नौकरी कर रहे थे। वहीं, सौरव दास देश की कानूनी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर लिखते थे और अपनी जिंदगी में बेहतर स्थिति में थे। दोनों के पास सफल करियर, आर्थिक सुरक्षा और आरामदायक जीवन जीने के पर्याप्त अवसर थे। इसके बावजूद उन्होंने समाज में बदलाव लाने की उम्मीद के साथ संघर्ष का रास्ता चुना।
‘दूसरों के लिए लड़ना सबसे बड़ी खूबी’
अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट में कहा कि आशुतोष और सौरव के पास अपनी सुविधाजनक जिंदगी छोड़ने या अनिश्चित परिस्थितियों का सामना करने की कोई मजबूरी नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने उन लोगों के लिए आवाज उठाने का फैसला किया, जिनसे उनका कोई निजी संबंध तक नहीं था।
उन्होंने कहा कि दोनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बेहतर सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने उन लोगों के अधिकारों के लिए लड़ना चुना, जो खुद को उतना सक्षम या भाग्यशाली नहीं पाते। दीपके के अनुसार, कोई भी उनसे इस तरह का त्याग करने की मांग नहीं कर रहा था, लेकिन उन्होंने अपनी इच्छा से दूसरों के हितों को प्राथमिकता दी।
सीजेपी संस्थापक ने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि किसी अनजान व्यक्ति के लिए खड़े होना, दूसरों के संघर्ष को अपना समझना और उनकी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए जोखिम उठाना किसी भी इंसान की बड़ी खूबी है। उन्होंने आशुतोष और सौरव को इसी सोच का उदाहरण बताया।
सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर पार्टी ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी ने आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी और जेल से रिहाई में हो रही देरी को लेकर पुलिस तथा प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि दोनों नेताओं की गिरफ्तारी को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है और अदालत की कार्यवाही में भी देरी हो रही है।
सीजेपी ने यह भी दावा किया कि जमानत के लिए पेश किए गए जमानतदारों की गारंटी को अस्पष्ट आधार पर खारिज कर दिया गया। हालांकि, ये पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
जानकारी के मुताबिक, जंतर-मंतर में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास न्यायिक हिरासत में हैं। हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की बात भी सामने आई थी।
इस बीच, मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकियां मिलने के संबंध में पुलिस ने गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की है। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और दोनों नेताओं की रिहाई पर नजर बनी हुई है।