1. नाचा पार्टी (रेवली नाचा पार्टी)संतोषी, तेंदूकोना, खट्टी, लाटाबोड़, कनेकरा, बगदेई, कासवाही अइसने गांव मं नाचा पार्टी के परंपरा आजो जिंदा हे।छत्तीसगढ़ के पहिली नाचा पार्टी “रेवली नाचा पार्टी” रहिस, जेनकर स्थापना सन् 1928 मं होय रहिस।ए पार्टी के संस्थापक रहिन दाऊ दुलार सिंह ‘मदरांजी’।ए पार्टी मं लालूराम, मदनलाल निषाद, जराठनाथ निर्मलक अउ प्रभूराम यादव जइसने कलाकार मन अपन अद्भुत कला ले सबो मन के मन मोह लेथें।
2. भतरानाट (उड़ियानाट)भतरानाट बस्तर जिला के पारंपरिक नाट्य रूप हे, जेन उड़ीसा ले आय हे, एही से कुछे मन एकर नाव उड़ियानाट घलो कहिथें।ए नाट मं एक मुख्य नाट गुरु रहिथे, अउ पात्र मन भतरी बोली मं गाथा गाथथें।नाट के कथावस्तु जियादातर पौराणिक कथा ऊपर आधार रखे गे हे –अभिमन्यु वध, जरासंध वध, कीचक वध, हिरण्यकश्यप वध, रावण वध, दुर्योधन वध, लक्ष्मी पुराण नाट, लंका दहन अउ कंस वध जइसने कथा मन बस्तर के भतरानाट मं जियादा गाये-बजाये जाथें।नाट के मंचन खुले मंयदान मं होथे, अउ सबो भूमिका पुरुष कलाकार मन निभाथें।
3. ककसार – मुड़िया जनजाति के धार्मिक नृत्यककसार बस्तर के मुड़िया जनजाति के एक पवित्र धार्मिक नृत्य-गीत हे।कहानी हे कि लिंगादेव (भगवान शंकर) करा अठारह बाजा रहिस, जेन वो मुड़िया मन ला दान दे दे रहिस।एही बाजा बजाके, गा-गुनगुनाके मुड़िया लोग हर हर साल ककसार पर्व मं लिंगादेव के आराधना करथें,जिहां गीत, बाजा, नाचा अउ भक्ति – सबो मिलके एक सुर मं गूंज उठथे।
4. चंदैनी गोंदा (प्रेमगाथा)छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध प्रेमगाथा लोरिक-चंदा के कथा ला ‘राऊत’ समाज के लोग गाथा रूप मं गावत आवत हें।ए गाथा के ऊपर आधारित नाचा ला “चंदैनी गोंदा” कहे जाथे।चंदैनी गोंदा नाचा एक खड़े साज के नाचा के रूप मं छत्तीसगढ़ के विशिष्ट पहचान बन गे हे।एकर सुर, भाव, नाचा अउ गाथा – सबो मिलके छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति के अमर प्रतीक बन गे हें।



