तिमाही पत्रिका

छत्तीसगढ़-छत्तीसगढ़ी-छत्तीसगढ़िया

हमर छत्तीसगढ़ राज मा अमारी भाजी ला खट्टा भाजी, अमटाहा भाजी अउ सलल भाजी के नाव ले जानथें। येखर वनस्पति नाव ‘हिबिस्कस केनेबिनस’ हे। गजबेच अम्मठ भाजी के रूप मा येला कच्चा अउ सुक्खा दुनों प्रकार ले मनभर खाये जाथे।

राँधे खातिर जिनिस- आधा किलो अमारी भाजी, (घाम मा चार-पाँच घंटा सुखाय अउ अइलाय), एक छटाक फींजे चना दार, चार-पाँच गोंदली लाम-लाम कटाय, एक नान्हें सुँतई हरदी भुरका,नून अपन सेवाद के नेत मा।

बघारे खातिर जिनिस- छै-सात सुक्खा लाल मिर्चा कुटका मा, छै-सात कुचराय लसुनफोरी, एक नान्हें डुवा खाय के तेल।
राँधे के बिधि- सबले पहिली कराही मा दू ले तीन गिलास पानी डारके डबकालव। कराही ला आगी आँच ले टारके डबकत पानी मा अइलाय भाजी ला डारदव। अब एक-दू मिनट अइसने छोड़दव। दू मिनट बाद भाजी ला चलनी मा हेर के बने तीन-चार पानी धोके निथारलव।
अब जुच्छा कराही मा तेल ला कड़का के लसुन अउ मिरचा के फोरन देदव। जब मिरचा अउ लसुन ललिया जाय तब कटाय गोंदली ला डारके एक-दू मिनट भूँजलव। फेर येखर बाद येमा फींजे चना दार ला डारके दू मिनट भूँजव अउ तहाँ निथरे भाजी ला डारदव। भाजी ला डारके बने खो दव। दू ले तीन मिनट भाजी चुरे के बाद येमा अपन सेवाद के नेत मा नून अउ भुरका हरदी डारके दू-चार मिनट अउ चुरन दव। अब आपके अमसुरहा अमारी भाजी चुर-पक के तियार हे, भात, बासी अउ रोटी संग खावव अउ खवावव।

ओखद गुण- अमारी भाजी मा आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट जइसन जिनिस भरपुरहा समाये रहिथे। देंह मा विटामिन मन के कमी-बेशी ला इही भाजी हा बरोबर पुरोथे। पेट के रोग-माँदी घलो अमारी भाजी के खाये ला दुरिहा जाथे

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